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विधानसभा में गूंजा सफाईकर्मियों की भर्ती का मुद्दा: NN81

 


विधायक अशोक कोठारी बोले- वाल्मीकि समाज को मिले सफाईकर्मियों की भर्ती में प्राथमिकता

पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान का दिया संदर्भ

 भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने आज राजस्थान विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से प्रदेश में सफाईकर्मियों की लंबित भर्ती और वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता देने का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। विधायक कोठारी ने अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छ भारत अभियान और कचरा मुक्त भारत जैसे राष्ट्रीय अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश स्तर पर स्वच्छता को जन आंदोलन बनाया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर सफाईकर्मियों की कमी के कारण इन अभियानों की भावना पूरी तरह साकार नहीं हो पा रही है।

विधायक कोठारी ने सदन में कहा कि जब कोई व्यक्ति सुबह घर से निकलता है और सड़क व नालियां गंदी दिखती हैं तो वह सबसे पहले स्थानीय जनप्रतिनिधि और सरकार को दोष देता है, जबकि वास्तविक समस्या सफाईकर्मियों की अपर्याप्त संख्या है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 के बाद से सफाईकर्मियों की नियमित भर्ती नहीं हुई है। पिछले वर्ष भर्ती का प्रयास भी अनुभव प्रमाण पत्र जैसी तकनीकी अड़चनों के कारण निरस्त करना पड़ा।

कोठारी ने विशेष रूप से वाल्मीकि समाज का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समाज परंपरागत रूप से सफाई कार्य से जुड़ा रहा है। ऐसे में इस समाज के लोगों से अनुभव प्रमाण पत्र मांगना व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि जब अन्य समाज के व्यक्तियों का चयन सफाईकर्मी के रूप में होता है तो वे अक्सर मूल सफाई कार्य के स्थान पर अन्य कार्यों में लग जाते हैं, जिससे सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है।

उन्होंने संविदा पर कार्यरत सफाईकर्मियों की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि वे शोषण पूर्ण परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं। उन्हें पर्याप्त मानदेय नहीं मिल रहा, न ही नियमानुसार पीएफ कट रहा है, जबकि वे सर्दी, गर्मी और बरसात में प्रतिदिन कठिन परिश्रम करते हैं।

विधायक कोठारी ने उदाहरण देते हुए बताया कि केवल भीलवाड़ा शहर में ही लगभग 2300 सफाईकर्मियों की आवश्यकता है। जबकि वर्तमान में मात्र 900 कर्मी कार्यरत हैं। इस कमी के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि सफाईकर्मियों की अस्थायी भर्ती तत्काल प्रारंभ की जाए। यदि अनुभव प्रमाण की आवश्यकता है तो चयनित कर्मियों को 2 से 3 वर्ष तक अस्थायी रूप से नियुक्त कर बाद में उनका स्थायीकरण किया जाए। साथ ही मस्टरोल प्रणाली के माध्यम से भर्ती कर भविष्य में नियमितीकरण का मार्ग प्रशस्त किया जाए, ताकि शहरों और गांवों में पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मी उपलब्ध हो सकें।

    कोठारी ने कहा कि यदि राज्य सरकार वास्तव में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वच्छता अभियान की भावना को जमीन पर उतारना चाहती है, तो सफाईकर्मियों की भर्ती और उनके सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों पर तुरंत ध्यान देना होगा।

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