नन्ही अरफजा ने कम उम्र में ही सब्र और हिम्मत की मिसाल पेश करते हुए पूरे दिन भूख-प्यास सहकर अल्लाह तआला की इबादत की। रोज़े के दौरान उन्होंने कुरआन की तिलावत की और देश में अमन-चैन, भाईचारा तथा सुख-शांति के लिए दुआ मांगी। इतनी छोटी उम्र में रोज़ा रखकर अरफजा ने यह साबित कर दिया कि सच्ची नीयत और अल्लाह पर भरोसा हो तो कोई भी इबादत मुश्किल नहीं होती।
परिवारजनों ने अरफजा को फूल-माला पहनाकर मुबारकबाद दी और विशेष पकवान बनाकर रोज़ा इफ्तार कराया। इस मौके पर घर में खुशी और रूहानी माहौल देखने को मिला। परिजनों ने दुआ की कि अल्लाह तआला अरफजा को लंबी उम्र, अच्छी सेहत और कामयाबी अता फरमाए।
रमज़ान का महीना सब्र, इबादत और इंसानियत का पैगाम देता है। अरफजा मंसुरी का पहला रोज़ा न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।
रिपोर्टर मोहम्मद आलम खान
