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बांग्लादेश में एक नए युग की शुरुआत! 17 फरवरी को शपथ लेंगे तारिक रहमान, भारत को भी न्योता, क्या पीएम मोदी जाएंगे: NN81

 बांग्लादेश में एक नए युग की शुरुआत! 17 फरवरी को शपथ लेंगे तारिक रहमान, भारत को भी न्योता, क्या पीएम मोदी जाएंगे


बांग्लादेश में अनिश्चितता के बाद अब राजनीतिक स्थिरता आने की संभावना नजर आ रही है। चुनावों में बीएनपी को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब शपथ ग्रहण की तैयारियां जोरों पर है। भारत समेत 13 देशों को न्योता दिया गया है। अब सवाल ये है कि क्या पीएम मोदी शपथ ग्रहण में जाएंगे?


ढाका: बांग्लादेश में आम चुनाव के नतीजे आने के बाद अब वहां की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारिां शुरू हो चुकी हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के मुताबिक पार्टी के शीर्ष नेता तारिक रहमान 17 फरवरी को नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।


बीएनपी ने इस शपथ ग्रहण समारोह को एक अंतरराष्ट्रीय कलेवर देने का फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए भारत और चीन समेत कुल 13 देशों को न्योता दिया है।

आमंत्रित देशों की लिस्ट
भारत
चीन
सऊदी अरब
पाकिस्तान
तुर्की
यूएई
कतर
मलेशिया
ब्रूनेई
श्रीलंका
नेपाल
मालदीव
भूटान

क्या PM मोदी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे?
प्रधानमंत्री मोदी के ढाका जाने की संभावना कम है, क्योंकि 17 फरवरी को मुंबई में इमैनुएल मैक्रों के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत होनी है। जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में नई दिल्ली की तरफ़ से कोई सीनियर सरकारी अधिकारी शामिल हो सकता है।

इससे पहले शुक्रवार को PM मोदी ने रहमान से फ़ोन पर बात की और BNP चीफ़ को बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी की ज़बरदस्त जीत पर बधाई दी। फ़ोन पर बात करने के बाद PM मोदी ने कहा, "मैंने बांग्लादेश के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने की उनकी कोशिश के लिए अपनी शुभकामनाएं और समर्थन दिया।"

उन्होंने आगे कहा, "गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों वाले दो करीबी पड़ोसियों के तौर पर, मैंने दोनों देशों के लोगों की शांति, तरक्की और खुशहाली के लिए भारत के लगातार कमिटमेंट को फिर से पक्का किया।" बता दें कि बांग्लादेश में संपन्न चुनाव में BNP ने 297 घोषित सीटों में से 209 सीटें जीतकर बड़ी जीत दर्ज की, जिससे लगभग दो दशकों के बाद सत्ता में उसकी वापसी का रास्ता साफ हो गया। पाकिस्तान के करीबी माने जाने वाले राइट-विंग जमात-ए-इस्लामी 68 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की लीडरशिप वाली अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था।

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