मध्यप्रदेश शिवपुरी से नितिन राजपूत जिला ब्यूरो रिपोर्टर
साझा कोशिशों से लौटी पूनम की मुस्कान:
ग्राम मेहरा की एक प्रेरक कहानी
यह कहानी पूनम नाम की एक नन्हीं बच्ची की है, जिसने अपनों के प्यार और प्रशासनिक सहयोग से कुपोषण के खिलाफ एक बड़ी जंग जीती है।
जब मासूम की जान पर बन आई
16 नवंबर 2023 को जन्मी पूनम की सेहत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी थी। जब दिसंबर 2024 में उसकी जांच की गई, तो उसका वजन मात्र 6 किलो 100 ग्राम था। इतनी कम उम्र में इतना कम वजन होने के कारण उसे 'गंभीर कुपोषित' (SAM) की श्रेणी में रखा गया। गृह भेंट के दौरान जब टीम ने पूनम की यह हालत देखी, तो उनके पैर ठिठक गए; बच्ची का जीवन खतरे में था। टीम ने तुरंत उसे अस्पताल (NRC) ले जाने की सलाह दी।
एक माँ की बेबसी और झिझक
पूनम की माँ, सावित्री, उसे भर्ती करने के लिए तैयार नहीं थीं। उनके मना करने के पीछे लापरवाही नहीं, बल्कि कुछ मजबूरियाँ थीं:
* घर पर दो छोटे बच्चों को अकेले संभालने की जिम्मेदारी थी।
* उनके पति अनिल, आलू की खुदाई के काम के लिए बाहर गए हुए थे।
* अस्पताल में रुकने को लेकर उनके मन में डर और अनजाना संकोच था।
जब सबने मिलकर बढ़ाया हाथ
मामले की गंभीरता को देखते हुए विकास संवाद पोहरी के जिला समन्वयक अजय यादव, कम्युनिटी मोबिलाइजर वर्षा ओझा और कोर ग्रुप के सदस्य अतर सिंह आदिवासी ने सीडीपीओ (CDPO) सर के साथ मिलकर मोर्चा संभाला।
पूरी टीम ने सावित्री के साथ बैठकर बड़े प्यार से बातचीत की:
* अजय यादव जी ने समझाया कि यह केवल शारीरिक कमजोरी नहीं है, बल्कि एक गंभीर बीमारी है जिसे डॉक्टरी इलाज की जरूरत है।
* सीडीपीओ सर ने भरोसा दिलाया कि अस्पताल में उन्हें बच्चे की सही देखभाल और पोषण के बारे में भी सिखाया जाएगा।
* वर्षा ओझा और अतर सिंह आदिवासी ने एक परिवार की तरह सावित्री का हौसला बढ़ाया और उनका डर दूर किया।
सुखद परिणाम: सेहत में सुधार का सफर
टीम की मेहनत और माँ के सही फैसले का असर जल्द ही दिखने लगा। पूनम को सही दवाएं और पौष्टिक आहार मिला, जिससे उसकी सेहत में चमत्कारिक बदलाव आए:
* सितंबर 2025: पूनम का वजन बढ़कर 8 किलो हो गया और वह 'गंभीर' से 'मध्यम कुपोषित' श्रेणी में आ गई।
* दिसंबर 2025: साल के अंत तक पूनम का वजन 9 किलो 500 ग्राम पहुँच गया और वह अब पूरी तरह 'सामान्य' श्रेणी में है।
आज पूनम एक स्वस्थ और खुशहाल बच्ची है। यह कहानी साबित करती है कि अगर सही समय पर मदद और सही समझाइश मिल जाए, तो किसी भी मासूम को नया जीवन दिया जा सकता है।
