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खामगांव की सिया नेस्ले इंटरनैशल कंपनी की विज्ञापन में चमकी: NN81

 

खामगांव जिला बुलढ़ाणा महाराष्ट्र 


 खामगांव जैसे छोटे शहर की  सिया ने हाल ही में नेस्ले जैसी इंटरनेशनल ब्रैंड की कंपनी की विज्ञापन में अपनी मासुमियत का जलवा बिखेरकर खामगांव का  नाम रौशन कर दिया 

इस फीचर विज्ञापन को हर रीजनल चैनल पर दिखाया जारहा है और 16–17  भाषाओं  में रिलीज़ हुई है।

दरअसल उस की मां(मदर) श्रेया ने कहा कि सिया हमेशा से ही एक बहुत इंटरैक्टिव बच्ची रही है। उस के पिता संचेत जगदीश नावंदर ,  बड़े दादा अनिल नावंदर , बड़ी दादी भारती अनिल नावंदर   दादा जगदीश नावंदर तथा दादी संगिता जगदीश नावंदर और परिवार के सभी सदस्यों के बीच  क्यूट, नैचुरल और इंटरैक्टिव मोमेंट्स इंस्टाग्राम पर शेयर करती थी।तब मुझे एक डायरेक्टर का मैसेज आया की वह एक

 कैंडिडेट की तलाश में हैं क्या आप इंटरेस्टेड हैं? पूरे इंडिया से 25 बच्चों को शॉर्टलिस्ट कर ऑडिशन लिया गया फिर उनमें से सिर्फ 3 बच्चों को ही मुंबई बुलाया गया।उनमें सिया सबसे छोटी थी उस समय सिया – सिर्फ सवा दो साल की थी मुंबई पहुँचकर उन्होंने सिया का कॉन्फिडेंस देखा, उसका कम्फर्ट लेवल देखाऔर वहीं से उसे सेलेक्ट किया गया।अगले दिन विज्ञापन शूट हुआ, जहाँ करीब 300 लोगों की टीम मौजूद थी। 

उसने पूरा शूट बहुत स्मूथली और खुशी-खुशी पूरा किया।

अगले दिन प्रिंट मीडिया शूट हुआ –

होर्डिंग्स, न्यूज़पेपर्स, बैनर्स के लिए अलग-अलग सीन को शुट किया गया।और इस तरह एक सक्सेसफुल पैकअप मुकम्मल हुआ।

सबसे इमोशनल मोमेंट तब था,

जब सेलिब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट्स और हेयरड्रेसर्स जाते-जाते सिया के साथ फोटो ले रहे थे और उसे अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर पोस्ट कर रहे थे।एक माँ के लिए इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है?

आज बहुत लोग सिया को जानते हैं, और उसकी वजह से मेरी भी एक पहचान बनी है। ये हर माँ के लिए गर्व की बात होती है। इसके पीछे दो सबसे ज़रूरी वजहें हैं। पहली – मेरी प्रेग्नेंसी जर्नी।

मैं पूरे प्रेग्नेंसी टाईम खुश, एक्टिव, क्रिएटिव और स्पिरिचुअल रही।

और वही चीज़ मुझे आज सिया में दिखती है –वो एक हैप्पी, एक्टिव और स्पिरिचुअल बच्ची है।

दूसरी – फैमिली सपोर्ट।

दादा-दादी, नाना-नानी के संस्कार और वैल्यूज़।इसी वजह से आज वो श्लोक बोलती है, संस्कारों से जुड़ी है। एक खूबसूरत माहौल बच्चे के  लिए बहुत ज़रूरी होता है,और सिया को वो माहौल उसकी फैमिली से मिला। अगर बच्चों को मौके मिलें,

तो हमें उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता जरूर देना चाहिए।आगे का काम वो खुद कर लेते हैं।



मोहम्मद फारूक खामगांव

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