लोकेशन कवर्धा छत्तीसगढ़
सहसपुर लोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत वीरेंद्र नगर के समीप टाटीकसा, कोहड़िया एवं सूरजपुरा—इन तीनों गांवों के मध्य भड़भड़ा नदी के पावन तट पर विराजमान भगवान नागादेव बाबा क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था का केंद्र हैं। यहां दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर पुनः बाबा के चरणों में शीश नवाने आते हैं।
स्थानीय जनमान्यता के अनुसार भगवान नागादेव बाबा की यह प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई चमत्कारिक मूर्ति है। इसे न तो किसी ने स्थापित किया है और न ही बनवाया है। क्षेत्रवासियों का विश्वास है कि बाबा नागादेव स्वयं इस स्थान पर विराजमान होकर ग्राम एवं आसपास के क्षेत्रों की रक्षा करते हैं।
हर वर्ष मकर संक्रांति पर लगता है भव्य मेला
प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर 13 व 14 जनवरी को यहां दो दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण एवं आसपास के क्षेत्रों से लोग सम्मिलित होते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो जाता है।
नागादेव बाबा का बनेगा भव्य मंदिर
वर्षों पुराना नागादेव बाबा मंदिर अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। इसे देखते हुए मंदिर के पुनर्निर्माण के उद्देश्य से नागादेव बाबा मंदिर निर्माण समिति का गठन किया गया है।
जबकि सदस्य के रूप में कयूम खान, संतोष साहू, फुलेश्वर निर्मलकर, प्रकाश साहू, घनश्याम साहू, दमलेश साहू, पुरुषोत्तम साहू, आशीष ठाकुर, आनंद पटेल, नूतन साहू, गोविंद साहू, राकेश साहू एवं झूलेलाल पटेल को शामिल किया गया है।
जनसहयोग से होगा मंदिर का निर्माण
नवनियुक्त अध्यक्ष प्रहलाद साहू ने बताया कि नागादेव बाबा का मंदिर अत्यंत प्राचीन है, जो अब क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसके पुनर्निर्माण हेतु समिति का गठन किया गया है। ग्रामवासियों एवं आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं से सहयोग राशि एकत्रित कर मंदिर को भव्य और आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा।
उन्होंने शासन-प्रशासन से भी मांग की है कि इस धार्मिक स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और क्षेत्र का सामाजिक व आर्थिक विकास हो सके।
श्रद्धा और आस्था का केंद्र
नागादेव बाबा मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है। मंदिर के पुनर्निर्माण और मेले की भव्य तैयारियों से ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
