लोकेशन नारायणपुर छत्तीसगढ़
संवाददाता खुमेश यादव
नारायणपुर जिले की धौड़ाई , सुलेंगा पंचायत के आश्रित गांव टिरकानार (हिचपुर पारा) में प्रशासन की लगातार अनदेखी से परेशान ग्रामीणों ने बिना किसी सरकारी सहायता के अपने श्रमदान और चंदे से एक किलोमीटर लंबी सड़क बना डाली। यह सड़क सिर्फ मिट्टी और पत्थरों की नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी पर करारा तमाचा है।ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे सड़क की मांग कर रहे थे। जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, अधिकारियों को आवेदन दिए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला लेकिन समाधान नहीं मिल पाया। गांव में सड़क नहीं होने से
बीमारों लेने को एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। राशन और जरूरी सामान लाना मुश्किल भरा सफर बन जाता है। बरसात में गांव पूरी तरह कट जाता एक तरह से टापू में तब्दील हो जाता है।
सरकार से जब उम्मीद टूटी, तब एकजुट हुआ गांव।
सरकार की राह ताकते–ताकते थक चुके ग्रामीणों ने आखिरकार खुद जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया।
हर घर से चंदा, हर हाथ से श्रमदान। बुजुर्ग, युवा और महिलाएं सभी सड़क निर्माण में जुट गए। “अब इंतजार नहीं करेंगे, अपने बच्चों और बुजुर्गों के लिए खुद रास्ता बनाएंगे”।ग्रामीणों का यह संकल्प आज सड़क बनकर साकार हो रहा है।
सवालों के घेरे में शासन–प्रशासन।
क्या आदिवासी अंचलों के गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से बाहर हैं? क्या सिर्फ चुनाव के समय ही नेताओं को इन गांवों की याद आती है? जब ग्रामीण खुद सड़क बना सकते हैं, तो प्रशासन क्यों नहीं?
क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी यह पहल।
टिरकानार गांव की यह अनूठी पहल अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी है। यह सड़क सिर्फ गांव को नहीं जोड़ रही, बल्कि शासन–प्रशासन को आईना भी दिखा रही है।
