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महा रास कंस वध एवं श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह का भागवत कथा में किया गया वर्णन - NN81




नौरोजाबाद// उमरिया 

मदनलाल बर्मन की रिपोर्ट 

उमरिया जिले के अंतर्गत ग्राम सकरवार में  राजपूत उत्सव समिति द्वारा चल रहे सार्वजनिक सप्ताहिक संगीत मय श्रीमद्भभागवत कथा ज्ञान उत्सव में वृंदावन से पधारे हुए कथा व्यास पंडित गिरधारी शरण शास्त्री जी के द्वारा छठे दिन 27 दिसंबर दिन शनिवार को ब्रज की लीला कृष्ण का महारास मुस्टिक एवं कंस वध के अतिरिक्त भगवान श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह की कथा का वर्णन किया*!!

इस कार्यक्रम में समस्त राजपूत परिवार के यजवान  ने उपस्थित रहे कथा का पूजन आचार्य अनुराग शास्त्री जी के द्वारा मंत्रों उच्चारण से कराया गया श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह का वर्णन करते हुए कथा व्यास पंडित गिरधारी शरण शास्त्री जी बताया कि विदर्भ के राजा श्री भीष्म की  पुत्री रुक्मणी मन ही मन श्री कृष्ण को बहुत चाहती थी, परंतु रुक्मणी के पिता और भाई श्री कृष्ण से जलते थे, इसलिए उन्होंने रुक्मणी का रिश्ता शिशुपाल से तय कर दिया, जब रुक्मणी को इस बात का पता लगा तो उसने श्री कृष्ण के पास पत्र भेज कर उसका अपहरण करने के लिए कहा, संदेश पाकर श्री कृष्ण ने ऐसा ही किया। और ओ रुक्मणी का हरण विवाह किया। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणी साक्षात लक्ष्मी है ,और वह नारायण से दूर ही नहीं सकती हैं, रुक्मणी ने जब देवर्षि से नारद के मुख से श्री कृष्णा के रूप सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो बहुत प्रभावित हुई और मन ही मन कृष्ण से विवाह  करने का निश्चय किया। *इस तरह से कथा व्यास के मुख से विवाह है का विस्तार वर्णन सुनकर श्रद्धालुगण मनमुग्ध होकर झूम उठे।

देर रात तक भक्ति का माहौल

कथा के दौरान संगीत में भजन गीतों से देर रात तक माहौल भक्ति में बना रहा, मुझे श्याम का सहारा, भजन सुनी सभी झूमने लगे आरती में भारी भीड़ उमर पड़ी, बीच-बीच में जय घोष से वातावरण गुंजायमान होता रहा, आयोजक राजपूत समिति ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया ।।

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