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वन्दे मातरम गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर महाविद्यालय में आयोजन - NN81



एमसीबी (छ.ग.)                  

रिपोर्ट - मनीराम सोनी       

एमसीबी / मनेन्द्रगढ़  शासकीय विवेकानन्द स्नातकोत्तर महाविद्यालय मनेन्द्रगढ़ में राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर भक्तिभाव से विद्यार्थियों एवं सभी अधिकारी, कर्मचारियों द्वारा पूर्ण राष्ट्रीय गीत का गायन किया गया। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के राष्ट्रीय कार्यक्रम को विद्यार्थी एवं अधिकारी, कर्मचारियों द्वारा ऑनलाईन सहभागिता की। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती के संरक्षण में सम्पन्न हुआ। प्रभारी प्राचार्य डॉ.सरोजबाला श्याग विश्नोई द्वारा इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि वन्दे मातरम गीत भारत माता के प्रति आदर, भक्ति और समर्पण की भावना का अद्भुत प्रतीक है। इसकी रचना बंकिमचन्द्र चटोपाध्याय जी ने 1882 में अपने सुप्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में की थी। परतंत्र भारत में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए यह गीत प्रेरणा का दीपक बना। उनके हृदय में वन्दे मातरम की शक्ति और जोश गूंजता था। यह गीत हमें याद दिलाता है कि हमारी धरती हमारी जननी है उसकी मिट्टी, उसकी नदियां, उसके पर्वत, उसकी हवा सब हमारी पहचान है। 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात वन्दे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया, जबकि जनगणमन को राष्ट्रीय गान का दर्जा दिया गया और ये दोनो ही हमारे राष्ट्र गौरव के प्रतीक है। इस गीत की गरिमा, सम्मान बनाये रखना हमारी जिम्मेदारी है। इस कार्यक्रम में डॉ. सुशील कुमार तिवारी, डॉ. अरूणिमा दत्ता, डॉ. प्रभा राज,  कमलेश पटेल, डॉ. रेनू प्रजापति, डॉ. रिंकी तिवारी,  अभिषेक कुमार सिंह,  पुष्पराज सिंह,  सुमित कुमार तिवारी, प्रकाश दास मानिकपुरी, मनीष कुमार श्रीवास्तव,  सुनीत जाँनसन बाड़ा, सुश्री साधना बुनकर एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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