संवाददाता
मनोज कुमार पात्रे
बिलासपुर छत्तीसगढ़
MBBS में एडमिशन लेने के लिए किया फर्जीवाड़ा
बिलासपुर में MBBS में एडमिशन लेने के लिए फर्जीवाड़ा किया गया है। फर्जी EWS (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) सर्टिफिकेट के जरिए नीट (UG) परीक्षा में तीन छात्राएं सिलेक्ट हो गईं। जिसके बाद मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में एडमिशन भी ले लीं। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने जब उनके सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन करवाया, तो EWS की मार्कशीट फर्जी निकली।
फर्जीवाड़ा उजागर होने पर अब राजस्व विभाग के अफसरों और कर्मचारियों पर सवाल उठ रहे हैं। जब विभाग ने सर्टिफिकेट जारी नहीं किया है, तो ऑनलाइन अपलोड होने वाले दस्तावेज छात्राओं के हाथ कैसे लगा। हालांकि, एसडीएम ने फर्जीवाड़ा सामने आने पर जांच रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई करने का भी दावा किया है। वहीं, अब कलेक्टर ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम से पूरी रिपोर्ट मांगी है।
वेरीफिकेशन में फर्जीवाड़ा का हुआ खुलासा
दरअसल, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा ने सीट अलॉटमेंट के बाद छात्रों के दस्तावेज़ वेरिफिकेशन के लिए बिलासपुर तहसील भेजा था। इसकी जांच हुई तब पता चला कि इन तीन छात्राओं के नाम पर कभी कोई आवेदन या प्रकरण तहसील में दर्ज ही नहीं हुआ था, फिर भी उनके नाम से EWS सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया।
तहसीलदार गरिमा सिंह ने स्पष्ट किया है कि इन छात्राओं के नाम से कभी कोई आवेदन तहसील कार्यालय में दर्ज नहीं हुआ। न ही तहसील से इन छात्राओं के नाम से कभी कोई सर्टिफिकेट जारी किया गया है।
बड़ा सवाल- छात्राओं के हाथ कैसे आया मार्कशीट
ऐसे में अब सवाल उठता है कि जब राजस्व विभाग के अफसरों ने मार्कशीट जारी नहीं किया है तो उनके सील और हस्ताक्षर वाला मार्कशीट यानी कि राजस्व विभाग का दस्तावेज छात्रों के हाथ कैसे लगा। आरोप है कि फर्जी सर्टिफिकेट बनाने में राजस्व विभाग के अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है।
मामला सामने आने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने एसडीएम मनीष साहू से जांच की पूरी रिपोर्ट मांगी है। वहीं, एसडीएम साहू का कहना है कि जांच रिपोर्ट में स्पष्ट है कि तीनों छात्राओं ने EWS सर्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं किये है। उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

