रामनगर मैहर - (कमलेश पांडेय)
दीपक तले अंधेरा सभी ने देखा होंगा। ठीक वही दस्तान पानी की समस्या पर नगर परिषद क्षेत्र रामनगर चरितार्थ हो रही है।
विस्थापित आदर्श ग्राम जब रामनगर था तब मात्र पानी की सप्लाई का साधन बरदहा पम्प हाउस और गोरसरी पानी की सप्लाई का माध्यम था। जब दिन रात रामनगर में मकान निर्माण चल रहा लाखों लीटर पानी प्रतिदिन उपयोग के बाद भी 11 महीने आमजन मानस को पानी की समस्या नहीं होती थी।
भवन निर्माण दैनिक जीवन में उपयोग जानवर मवेशियों पशु पक्षियों को ही भरपूर पानी मिलता था।
नगर पंचायत बनते ही पानी की समस्या ने नगरवासी को पानी से व्याकुल कर दिया है। वो भी जब पानी की समस्या से निदान के लिए बरौधा पम्प हाउस कई सारे नलकूपों का खनन पम्प मोटर सप्लाई के बाद ये समस्या ने रूप लिया है। जिसमें करोड़ों रूपए खर्च हो चुके हैं।
जितना पैसा रामनगर में पानी की समस्या से निजात पर खर्च हुआ उतने में रामनगर को पानी में डूबोया जा सकता था।
रामनगर में पानी की सप्लाई के लिए लाखों नहीं करोड़ों रुपए खर्च किये जा चुके हैं। पाइप पर पाइप लाइन का कार्य होता रहता है पर नतीजा पानी के लिए रामनगर वाशियो की समस्या घर बना चुका है। बस बातें तो बहोत होती है पर भौतिक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
पानी की समस्या से निजात मे जितनी राशि खर्च की जा चुकी है उससे कम पैसे में रामनगर को पानी से बोरा जा सकता था। रामनगर से महज पांच किलोमीटर की दूरी गजास मे बाणसागर जलासय क्षेत्र में पानी बारह महीने भरा रहता है।
आम जनमानस की समस्याओं से निजात हो जाए तो जुम्मेवार की अवैध कमाई में विराम लग जाएगा।
