लोकेशन नारायणपुर छत्तीसगढ़
संवाददाता खुमेश यादव
नारायणपुर प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी विश्व हिन्दू परिषद की 61वें स्थापना दिवस के अवसर पर बजरंग दल ने कोटगोडिन मंदिर के पास आयोजन किया।
ज्ञात हो कि, भारत की आजादी के बाद भी स्वतंत्र भारत में गौ हत्या नहीं रुकी मंदिरों पर हमले होते रहे माता बहनों का अपमान होता रहा लव जिहाद और धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जाने लगा इस प्रकार से हिन्दू धर्म हित में सन 1964 के संत सम्मेलन में भारत के विभिन्न प्रांतो से सम्मिलित हुए धर्माचार्य ने मिलकर एक स्वर में भारत के समस्त हिंदुओं को एक करने के लिए एक संगठन का निर्माण करने की घोषणा की उनका कहना था कि, समस्त विश्व में सर्व प्रथम सनातन धर्म ही था जिसके बाद अलग अलग पंथ बने हिन्दू धर्म में चार वर्ण का उल्लेख किया गया है जो कि, योग्यता एवं कार्य पर आधारित है। लेकिन भारतीय लोगों को गुलामी के समय में डरा कर और अंग्रेजी काल में लालच देकर सनातनियों को अपने साथ मिलाने का षड्यंत्र चला और हिन्दुओं को जाति में बांट कर देश पर कब्जा करने की साजिश आज भी निरंतर जारी है। ऐसे विदेशी आक्रांताओं के धर्म को भारत के अशिक्षित और वंचित लोगों के द्वारा अपना लिया गया वो सभी हमारे ही अपने हैं जो भटक कर अन्य बाहरी लोगों से प्रभावित हैं। उस समय हिन्दू धर्म के संतों ने कहा "हिंदूवा सोदरा: सर्वे न हिंदू पतितो भवेत्" अर्थात हिन्दुओं को जाति भेद में बंट कर नहीं रहना चाहिए जाति में बंटने से हिन्दुओं का पतन हुआ है।
इस प्रकार आज ही के दिन जन्माष्टमी के अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद संगठन की स्थापना हुई। आज विश्व हिंदू परिषद की स्थापना दिवस के अवसर पर नारायणपुर विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के द्वारा मटकी फोड़ का आयोजन किया गया जिसमें नगर के युवा और महिलाओं एवं बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया समस्त बालक बालिकाओं एवं भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप को धारण किए हुए बच्चों को मटकी फोड़ने का अवसर प्रदान किया गया उसके पश्चात बालक बालिकाओं को एवं महिलाओं को मटकी फोड़ने का अवसर बारी-बारी से दिया गया इसके पश्चात बजरंग दल के युवा युवाओं को मटकी फोड़ने कहा गया मटकी फोड़ने आए हुए समस्त लोगों को विश्व हिंदू परिषद की स्थापना दिवस के अवसर पर भेंट प्रदान किया गया। अध्यक्ष श्री गोपाल दुग्गा ने कहा कि, विश्व हिन्दू परिषद का उद्देश्य है कि, हमारे देश के सभी हिन्दू एक सूत्र में बंध कर रहें भारत मूल निवासी और यहां के आदिवासी अपनी संस्कृति परंपरा का पालन करते हुए अच्छी जीवन जीयें और किसी भी लालच में आ कर अपनी संस्कृति को मत छोड़ें आदिवासी को आदिवासी रहना चाहिए

