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सूखता के नाम पर किसानों से अधिक मात्रा में धान की खरीदी, प्रबंधक की मनमानी से ठगे जा रहे किसान - NN81

 जिला - कबीरधाम ( छत्तीसगढ़)



जिला ब्यूरो चीफ - उमेश कुमार छेदावी 


कवर्धा: कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड के बीरेंद्रनगर धान खरीदी केंद्र में किसानों के साथ अनियमितता और मनमानी का मामला सामने आया है। प्रबंधक द्वारा किसानों से प्रति किलों 40.50 किलो ग्राम धान लेने का प्रावधान है, लेकिन इसके विपरीत प्रबंधक 41.50 किलो ग्राम धान लेने की जिद पर अड़े हुए हैं।




किसानों ने जब इस पर आपत्ति जताई और प्रबंधक से बातचीत की, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जो करना है कर लो, मैं 41.50 किलो ग्राम ही लूंगा।” यह बयान किसानों के साथ अपमानजनक व्यवहार और प्रशासनिक नियमों की अवहेलना को उजागर करता है।


किसानों ने मीडिया को बताया कि प्रबंधक द्वारा उन्हें घर से 41.50 किलो की तौल में लेकर आने कहा जाता है और ऐसा नहीं करने पर उनका धान नहीं तौला जाता है। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रबंधक के इशारे में हमाल द्वारा कार्य किया जाता है। 41.50 किलोग्राम धान नहीं होने पर संबंधित किसान का धान न तौलकर दूसरे किसान का धान तौलना शुरू कर दिया जाता है।


किसानों का कहना है कि प्रबंधक की यह मनमानी उनके हितों पर सीधा आघात है। केंद्र में तय सीमा से अधिक मात्रा में धान लिए जाने से उन्हें न केवल आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि धान के तौल और भंडारण में भी समस्याएं आएंगी।


मीडिया पर भड़के प्रबंधक के शागिर्द


मीडियाकर्मी जब बीरेंद्रनगर धान खरीदी केंद्र में चल रहे खरीदी का निरीक्षण करने पहुंचे और किसानों से तौल की जानकारी लेनी चाही तो प्रबंधक के इशारे पर उनके पाले हुए शागिर्द ने अपने आप को किसान बताते हुए मीडियाकर्मियों से बत्तमीजी की। उनके द्वारा तौल के सामने खड़ा होकर तौल की जानकारी लेने से मना करते हुए किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई। किसानों से पूछताछ पर दबंगई दिखाते हुए मीडियाकर्मियों से वाद-विवाद पर उतारू हो गए।


किसान संगठन ने की उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग


इस मामले को लेकर किसान संगठनों ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से तत्काल जांच और प्रबंधक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कदम नहीं उठाए, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में


अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कार्रवाई करता है। क्या किसानों के हितों की रक्षा की जाएगी, या फिर धान खरीदी केंद्र में चल रही अनियमितताओं को नजरअंदाज किया जाएगा?

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