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ब्रह्मलीन हुए संत सियाराम बाबा : NN81

 स्लग:----- ब्रह्मलीन हुए संत सियाराम बाबा।

 सियाराम बाबा के आश्रम को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करेंगे- मुख्यमंत्री।

 बाबा पांच तत्व मे विलिन । लाखों श्रद्धालुओं दी विदाई।


 मनावर धार से  आशीष जौहरी की रिपोर्ट ।



विओ:----निमाड़ के  प्रसिद्ध  संत सियाराम बाबा  ग्राम-तेली भट्याण  का अगहन  माह की  शुक्ल पक्ष  की एकादशी  तिथि बुधवार को प्रातः 6:10 बजे देव लोक गमन  हो गया।  संत श्री का अंतिम दर्शन के लिए भक्तो का तांता लगा रहा। संत श्री सियाराम बाबा का श्रद्धा  सुमन अर्पित करने के लिए मुख्यमंत्री डा मोहन यादव  तेली भट्याण पहुंचे ।


10 वर्षों तक की मौन तपस्या  की


संत सियाराम बाबा का जन्म गुजरात के भावनगर में 1933  मे हुआ था। वह 17 वर्ष की उम्र में गुरुओ के साथ निकल गए थे ।तेली भट्याण  मे 1955 में आए थे। पेड के नीचे  मौन  तपस्या करने लगे थे। अनुयायियों ने बताया कि बाबा का असली नाम कोई नहीं जानता।  उन्होंने 10 साल तक मौन व्रत किया था।  जब उन्होंने मौन तपस्या व्रत तोड़ा तो  पहला शब्द जय सियाराम बोले ।उनका नाम संत सियाराम बाबा हो गया ।अनुयायियो ने बताया कि वर्तमान आयु लगभग 91 वर्ष की थी। श्रद्धालुओं से मात्र 10  रूप ये का दान स्वरूप लेते थे। यदि कोई उन्हें इससे ज्यादा का नोट देता था तो वह 10  रूपये की रसीद काटकर वापस दे देते थे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सियाराम बाबा के आश्रम को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की ।और उन्होंने कहा कि जो भी समिति मांगेगी वह उन्हें दे देंगे । संत सियाराम बाबा न सिर्फ निमाड़ के अपितु समूचे प्रदेश की जनता के लिए श्रद्धा का केंद्र थे। संत सियाराम बाबा ने हनुमान जी  से भी साक्षात्कार किया था ।केवल हनुमान जी का मंदिर ही था,जहां पर रामायण का 24 घंटे पाठ करते थे। स्वच्छता पर भी ध्यान देते थे ।केवल एक लंगोट पहनकर रखते थे। अधिकांश समय रामायण में ही लगता था ।बरसात के मौसम में भी केवल एक लंगोट पहनते थे ।भक्तों ने कभी पूरे कपड़ों में नहीं देखा। आश्रम में नर्मदा परिक्रमा वासियो के लिए नि :शुल्क  भोजन  चलता था। बाबा प्रतिदिन नर्मदा में स्नान करते थे ।अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण में 200000 रुपए की राशि भेंट की थी। श्री राम धुन 24 घंटे चलती थी । श्री रामचरितमानस का पाठ करते थे। मां विंध्यवासिनी मां पार्वती मंदिर में 25 लाख रुपए से ज्यादा की रकम मंदिर में निर्माण में भेट की थी। मुखाग्नि विष्णु संप्रदाय के साधुओं ने दी, जहां पर श्री श्री 1008 श्री गजानन जी महाराज अंबिका आश्रम  श्रीबालीपुरधाम से श्री श्री संत सुधाकर जी महाराज ने भी मुखाग्नि के कार्यक्रम में भाग लिया। संत श्री सुधाकर  जी महाराज  के साथ जगदीश पाटीदार, नवनीत पाटीदार एवम अन्य भक्तों ने भी मुखाग्नि के समय कार्यक्रम में परिक्रमा  की।

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