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Dhar : औंकारेश्वर मे श्रद्धा, भक्ति ,उत्साह और प्रेम से मनाया श्रावणी उपाक्रम पर्व- श्री योगेश जी महाराज




मनावर से न्यूज़ नेशन 81 के लिए संजय खंडेलवाल की रिपोर्ट


श्री श्री 1008 श्री गजानन जी महाराज ,श्री अंबिका आश्रम , श्रीबालीपुर धाम के तत्वाधान में श्रावणी उपक्रम श्री योगेश जी महाराज एवं श्री सुधाकर जी महाराज के सानिध्य में ओंकारेश्वर में संपन्न हुआ। श्री योगेश जी महाराज ने बताया कि श्रद्धा,भक्ति,उत्साह , विश्वास और पवित्रता से ब्राह्मणों ने अभय घाट पर स्थित रेवा तट पर देवताओं, ऋषियों, और अपने पितरों के निमित्त तर्पण किया। तत्पश्चात अपने पुराने धारण किए हुए यज्ञोपवीत( जनेऊ )का विसर्जन करके नया जनेऊ धारण किया ।साल भर में जाने अनजाने में हुऐ पापों के लिए ब्राह्मणो द्वारा प्रायश्चित किया। शुद्ध श्रावण शुक्ल पक्ष के अन्तिम सोमवार पूर्णिमा के दिन उपाक्रम विधि अभय घाट के रेवा तट पर संपन्न हुई। इस दौरान हिमाद्रि संकल्प, दस विधि स्नान, दान, तर्पण, मार्जन, सप्त ऋषि पूजन सहित विभिन्न शास्त्रोक्त किर्याये करवाई गई। इसके बाद यज्ञोपवीत यानी जनेऊ को बदला गया। उपकर्म विधि के दौरान जनेऊ को बदलने के लिए सबसे पहले पंचगव्य का पान कर पवित्र कुशा को अपने हाथ में लेकर पूरे साल के किए हुए पाप कर्म का प्रायश्चित किया गया।जनेऊ धारियो द्वारा पवित्र रेवा तट में स्नान कर नई जनेऊ धारण की गई। उन्होंने आगे कहा कि उपाकर्म के तीन पक्ष प्रायश्चित संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय है। हिंदू धर्म प्रवाहशील जीवन धर्म है।सीधा सा अर्थ है -मनुष्य परम लक्ष्य को प्राप्त कर सके। उपनयन ,यजुर्वेद और अथर्ववेद में लिखा है कि जनेऊ धारण करने से उच्च चरित्र का विकास होता है। जीवन भर सीने से चिपका धागा उसे कर्तव्य निष्ठ बनाता है। श्री गजानन जी महाराज( बाबा जी )के बताएं अनुसार जनेऊ कार्यक्रम उसी स्थल पर हो रहा है। आखिरी श्रावण सोमवार को पूर्णिमा के दिन श्रावणी उपकर्म विधि प्रारंभ हुई। आचार्य पंडित दुर्गाशंकर तारे,बंटी महाराज और रविन्द्र शुक्ला जी ने जनेऊ कार्यक्रम संपन्न करवाया।  

                         सद्गुरु सेवा समिति के जगदीश पाटीदार ने बताया कि सुबह से लेकर रात्रि कालीन 9:00 बजे तक यह कार्यक्रम तपती हुई धूप में संपन्न हुआ । भोलेनाथ की आरती,नर्मदा मैया की आरती एवम गुरुजी की आरती हुई। आचार्यो को भेंट राशि दी गई। विज्ञान आध्यात्म प्रयोग शाला मे भंडारा हुआ। ओंकारेश्वर और ओंम्कार मंगलेश्वर में श्री योगेश जी महाराज ने अभिषेक कर दर्शन एवं पूजन- अर्चन का लाभ लिया। ओंकारेश्वर की प्राकृतिक सुंदरता से सुसज्जित प्राचीन जंगल जहां नदियों का संगम स्थल है श्रावणी उपकर्म किया।लगभग 546 ब्राह्मणो एवम अन्य लोगो ने जनेऊ धारण कर संस्कारमय बने। सभी भक्तों का सहयोग रहा।

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